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BNS Section 10 ,11,12,13, BNS

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What is the punishment for Section 10,11,12,13, BNS भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 10, 11, 12 और 13 को समझना हमारे कानूनी ज्ञान के लिए अत्यंत आवश्

 BNS Section 10 ,11,12,13, BNS

Punishment of person guilty of one of several offences







भारतीय न्याय संहिता  (BNS)

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 10, 11, 12 और 13 को समझना हमारे कानूनी ज्ञान के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह धाराएं विशेष रूप से सजा से संबंधित हैं और यह निर्धारित करती हैं कि किन परिस्थितियों में किस प्रकार की सजा दी जाएगी। आइए इन धाराओं को आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं।




भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 10, 11, 12 और 13




धारा का उद्देश्य:

धारा 10 का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब किसी व्यक्ति पर कई अपराधों का शक हो और यह स्पष्ट नहीं हो पाए कि उसने इन अपराधों में से कौन-सा अपराध वास्तव में किया है, तब उसे सबसे कम दंड वाले अपराध की सजा दी जाए।


उदाहरण के साथ समझिए:

मान लीजिए किसी व्यक्ति पर तीन अलग-अलग अपराधों का संदेह है:

  • अपराध A: जिसकी अधिकतम सजा 10 साल है।

  • अपराध B: जिसकी अधिकतम सजा 7 साल है।

  • अपराध C: जिसकी अधिकतम सजा 3 साल है।

अब अदालत को यह भरोसा है कि उस व्यक्ति ने इन तीनों में से कोई एक अपराध अवश्य किया है, परंतु यह तय नहीं हो पा रहा कि कौन-सा। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को उस अपराध की सजा दी जाएगी जिसकी सजा सबसे कम है, यानी कि अपराध C की।


न्यायिक दृष्टिकोण:

इस धारा के पीछे न्याय का सिद्धांत है कि किसी व्यक्ति को बिना पूर्ण प्रमाण के कठोर दंड नहीं दिया जाना चाहिए। यह धारणा आरोपी के अधिकारों की रक्षा करती है और कानून के प्रति संतुलन बनाए रखती है।



धारा 11 – एकांत कारावास (Solitary Confinement)

क्या है एकांत कारावास?

जब किसी व्यक्ति को कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई जाती है, तब अदालत यह आदेश दे सकती है कि उसे कुछ समय के लिए अन्य कैदियों से अलग रखा जाए। इसे ही एकांत कारावास कहा जाता है।



यह कब और कितने समय के लिए दिया जा सकता है?


धारा 11 के अनुसार, सजा की अवधि के अनुसार एकांत कारावास की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है:


सजा की अवधि
एकांत कारावास की अधिकतम अवधि
6 महीने तक अधिकतम 1 महीना
6 महीने से 1 साल तक अधिकतम 2 महीने
1 साल से अधिक अधिकतम 3 महीने



विशेष नियम:

  1. 14 दिनों की सीमा: किसी भी परिस्थिति में एकांत कारावास की लगातार अवधि 14 दिन से अधिक नहीं हो सकती।

  2. अवधियों के बीच अंतराल: यदि किसी व्यक्ति को 14 दिनों के लिए एकांत में रखा गया है, तो अगली बार एकांत में रखने से पहले कम से कम 14 दिन का अंतराल देना अनिवार्य है।

  3. तीन महीने से अधिक की सजा: यदि किसी को तीन महीने से अधिक की सजा हुई है, तो किसी भी महीने में उसे अधिकतम सात दिन ही एकांत में रखा जा सकता है।



उद्देश्य:

एकांत कारावास मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कठिन सजा मानी जाती है। इसलिए कानून इस सजा को संतुलित और सीमित करने का प्रयास करता है ताकि व्यक्ति की मूलभूत मानवाधिकारों की रक्षा हो सके।






धारा 12 – सजा में छूट (Remission of Punishment)

इस धारा का प्रावधान:

धारा 12 यह कहती है कि राज्य सरकार के पास यह अधिकार होता है कि वह किसी दोषी व्यक्ति की सजा को कम या माफ कर सकती है। यह छूट विभिन्न मानवीय, व्यवहारिक या चिकित्सा आधारों पर दी जा सकती है।



कब दी जा सकती है छूट?

  • दोषी के अच्छे व्यवहार के आधार पर।

  • दोषी की उम्र अधिक होने पर।

  • कोई गंभीर बीमारी होने पर।

  • सामाजिक पुनर्वास के प्रयोजन से।



उद्देश्य:

यह धारा न्याय व्यवस्था को और अधिक मानवीय बनाती है। यह सरकार को यह शक्ति देती है कि वह जरूरत पड़ने पर न्याय में नरमी दिखा सके और व्यक्ति को समाज में दोबारा शामिल होने का अवसर मिल सके।धारा 13 – बाद के अपराध (Subsequent Offences)



इस धारा की आवश्यकता:

अगर कोई व्यक्ति पहले ही किसी गंभीर अपराध में दोषी पाया गया हो और वही अपराध दोबारा करता है, तो उस पर और कड़ी सजा का प्रावधान होना जरूरी है। यही उद्देश्य इस धारा का है।



किन अपराधों पर लागू होती है यह धारा?

यह धारा विशेष रूप से दो अध्यायों के अंतर्गत आने वाले अपराधों पर लागू होती है:

  • अध्याय X: जिसमें सरकारी सेवकों से संबंधित अपराध शामिल होते हैं जैसे कर्तव्य में लापरवाही, भ्रष्टाचार आदि।

  • अध्याय XVII: जिसमें संपत्ति संबंधी अपराध जैसे चोरी, डकैती, ठगी आदि आते हैं।



उदाहरण:

मान लीजिए, किसी व्यक्ति ने पहली बार चोरी की और उसे तीन साल की सजा हुई। जेल से छूटने के बाद वह फिर चोरी करता है। अब यह दोबारा किया गया अपराध है और इस पर सख्त सजा लागू होगी।


सजा का प्रावधान:

  • ऐसी स्थिति में व्यक्ति को 10 साल तक की सजा या आजीवन कारावास (Life Imprisonment) दी जा सकती है।

  • यह सजा प्रत्येक अपराध के लिए अलग-अलग भी दी जा सकती है।



उद्देश्य:

इस धारा का उद्देश्य यह है कि अपराधियों को बार-बार अपराध करने से रोका जा सके और यदि कोई व्यक्ति सुधार की बजाय पुनः अपराध करता है, तो उसे कड़ी सजा देकर न्याय की रक्षा की जा सके।



निष्कर्ष (Conclusion)

धारा 10 भारतीय न्याय व्यवस्था की न्यायप्रियता (fairness) को दर्शाती है। यह सुनिश्चित करती है कि:

  • कोई व्यक्ति एक ही काम के लिए बार-बार सजा न पाए।

  • अदालत सजा तय करते समय अपराध की प्रकृति और गंभीरता को संतुलित रूप से देखे।


भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 10 से 13 यह स्पष्ट करती हैं कि सजा के प्रावधान किस प्रकार संतुलित, न्यायसंगत और मानवीय होने चाहिए।

  • धारा 10 यह सुनिश्चित करती है कि संदेह की स्थिति में व्यक्ति को कठोर सजा न दी जाए।

  • धारा 11 यह सुनिश्चित करती है कि एकांत कारावास जैसे मानसिक रूप से कठिन दंड सीमित और नियंत्रित हों।

  • धारा 12 राज्य सरकार को यह अधिकार देती है कि वह सजा में नरमी दिखा सके।

  • धारा 13 यह सुनिश्चित करती है कि बार-बार अपराध करने वाले लोगों को कड़ी सजा मिले।



इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य न केवल अपराध को दंडित करना है, बल्कि न्याय व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना, मानवाधिकारों की रक्षा करना और अपराधियों को सुधार का अवसर देना भी है। इन धाराओं को समझकर हम यह जान सकते हैं कि भारतीय न्याय प्रणाली केवल दंड पर केंद्रित नहीं है, बल्कि न्याय और सुधार की दिशा में भी काम करती है। BNS Section 14...


भारतीय न्याय संहिता (BNS) संबंधित FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवालात 


प्रश्न 1: भारतीय न्याय संहिता की धारा 10 का क्या उद्देश्य है?

उत्तर: धारा 10 का उद्देश्य है कि यदि किसी व्यक्ति पर कई अपराधों का संदेह हो लेकिन यह स्पष्ट न हो पाए कि उसने इनमें से कौन-सा अपराध किया है, तो उसे उस अपराध की सजा दी जाए जिसकी सजा सबसे कम हो।


प्रश्न 2: धारा 10 का कोई उदाहरण समझाएं?

उत्तर: उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति पर A (10 साल), B (7 साल), और C (3 साल) के अपराध का संदेह है। यदि यह निश्चित न हो सके कि उसने कौन-सा अपराध किया है, तो उसे अपराध C की 3 साल वाली सबसे कम सजा दी जाएगी।



प्रश्न 3: एकांत कारावास (Solitary Confinement) क्या होता है और इसे कब दिया जा सकता है?

उत्तर: धारा 11 के अनुसार, एकांत कारावास वह होता है जिसमें दोषी व्यक्ति को अन्य कैदियों से अलग रखा जाता है। यह केवल कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) के मामलों में ही दिया जा सकता है और इसकी अधिकतम अवधि सजा की लंबाई पर निर्भर करती है।



प्रश्न 4: एकांत कारावास की अधिकतम अवधि कितनी हो सकती है?

उत्तर:

  • सजा 6 महीने तक: अधिकतम 1 महीना

  • 6 महीने से 1 साल: अधिकतम 2 महीने

  • 1 साल से अधिक: अधिकतम 3 महीने

  • साथ ही, लगातार एकांत कारावास 14 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकता।


प्रश्न 5: धारा 12 के अंतर्गत राज्य सरकार क्या कर सकती है?

उत्तर: धारा 12 के अनुसार, राज्य सरकार दोषी व्यक्ति की सजा को कम, बदल या माफ कर सकती है। यह छूट अच्छे व्यवहार, स्वास्थ्य, उम्र या सामाजिक पुनर्वास के आधार पर दी जाती है।


प्रश्न 6: क्या धारा 12 का मतलब यह है कि दोषी बिना सजा पूरी किए छूट सकता है?

उत्तर: हाँ, यदि सरकार को लगे कि दोषी सुधार हो गया है और मानवीय आधार पर उसे छूट दी जा सकती है, तो सजा पूरी होने से पहले भी राहत दी जा सकती है।


प्रश्न 7: धारा 13 क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: धारा 13 उन अपराधियों के लिए है जो एक गंभीर अपराध करने के बाद फिर से वही अपराध करते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें पहले से अधिक कड़ी सजा दी जाती है।


प्रश्न 8: किन अपराधों पर धारा 13 लागू होती है?

उत्तर: यह धारा BNS के अध्याय X (सरकारी सेवकों के अपराध) और अध्याय XVII (संपत्ति से संबंधित अपराध) जैसे चोरी, डकैती आदि पर लागू होती है।


प्रश्न 9: क्या बार-बार अपराध करने पर आजीवन कारावास हो सकता है?

उत्तर: हाँ, यदि कोई व्यक्ति दोबारा गंभीर अपराध करता है, तो अदालत उसे 10 साल तक की सजा या आजीवन कारावास दे सकती है।


प्रश्न 10: इन धाराओं का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इन धाराओं का उद्देश्य न्याय को संतुलित बनाना, निर्दोष को बचाना, दोषी को दंड देना, बार-बार अपराध करने वालों को रोकना, और आवश्यकता होने पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाना है।


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